Star, Zee, Sony चैनल्स क्यों हुए केबल टीवी से गायब? कौन है इसके पीछे?

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नई दिल्ली: रविवार को देश के तीन सबसे बड़े broadcasters – डिज़्नी स्टार इंडिया, ज़ी एंटरटेनमेंट और सोनी – ने करीब 10 बड़े केबल ऑपरेटरों को, जो All India Digital Cable Federation (AIDCF) के सदस्य हैं, अपने चैनलों के सिग्नल देना बंद कर दिया। 

देश में पे (pay) केबल टीवी कनेक्शन का तकरीबन 50% हिस्सा इन केबल ऑपरेटरों के पास है। ये 10 केबल ऑपरेटर पे केबल टीवी वाले कुल साढ़े 6 करोड़ घरों में से 3 करोड़ घरों में टीवी के जरिये मनोरंजन पहुंचाने का काम करते हैं।

ग़ौरतलब है कि AIDCF के ही एक सदस्य SITI Cable ने NTO 3.0 के तहत डील किये हैं और उसके उपभोक्ताओें को सभी चैनल निर्बाध मिल रहे हैं।

क्यों कटे इन केबल ऑपरेटरों के कनेक्शन

इन केबल ऑपरेटरों ने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) द्वारा अधिसूचित संशोधित नए टैरिफ ऑर्डर (NTO 3.0) के प्रावधानों के अनुसार broadcasters के साथ इंटरकनेक्शन डील पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

TRAI के अधिनियमों के मुताबिक कोई भी broadcaster इंटरकनेक्शन डील पर हस्ताक्षऱ होने के बाद ही अपने चैनलों का सिग्नल केबल ऑपरेटर को मुहैय्या करा सकता है।

NTO 3.0 के तहत 1 फरवरी तक सभी इंटरकनेक्शन डील पर हस्ताक्षऱ हो जाने चाहिए थे। ऐसे में ये broadcasters डील पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले केबल ऑपरेटरों को 1 फरवरी के बाद सिग्नल दे कर नियमों का उल्लंघन कर रहे थे।

क्या हैं केबल ऑपरेटरों की शिकायतें

NTO 3.0 लागू होने से पहले कई broadcasters ने अपने चुनिंदा चैनलों की MRP और bouquet की कीमतों में TRAI के प्रावधानों के तहत बढ़ोत्तरी की। यह बढ़ोत्तरी चार सालों में पहली बार की गई।

हालांकि broadcasters ने कीमतों में यह बढ़ोत्तरी TRAI की हिदायतों को ध्यान में रखते हुए कि जिससे उपभोक्ता की जेब पर इसका भारी असर ना पड़े और उनके चैनलों के दर्शक कम ना हो जाएं।

अगर broadcasters की मानें तो कीमतों में ये बढ़ोत्तरी एक उपभोक्ता की जेब पर ज्यादा से ज्यादा 10% अतिरिक्त बोझ डालेगी और उनके हिसाब से चार सालों में इतनी बढ़ोत्तरी वाज़िब है।

इसके उलट, केबल ऑपरेटरों ने इन कीमतों में बढ़ोत्तरी को बतहाशा बताते हुए broadcasters के साथ डील पर हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया है।

कीमतों में बढ़ोत्तरी का मामला कोर्ट में

AIDCF ने NTO 3.0 के खिलाफ देश भर के विभिन्न उच्च न्यायालयों में कई याचिकाएँ दायर की हैं। हालांकि किसी भी न्यायालय ने NTO 3.0 पर किसी तरह के अंतरिम रोक या किसी तरह की कार्रवाई पर रोक से इन्कार कर दिया है और ऐसे में NTO 3.0 वैधानिक तरीके से पूरे देश भर में लागू है।

बावजूद इसके, केबल ऑपरेटरों का आरोप है कि न्यायालय के अंतिम फैसले से पहले कनेक्शन काटने वाले broadcasters जनता के दुशमन हैं।

AIDCF के महासचिव मनोज छंगानी ने कहा, “केबल ऑपरेटरों को मात्र 48 घंटे का नोटिस देकर डिज्नी-स्टार, सोनी और ज़ी ने मामला उप-न्यायिक होने के बावजूद कनेक्शन काट दिए। परिणामस्वरूप देश भर में लगभग 4,50,00,000 केबल टीवी परिवार इनके चैनल नहीं देख पा रहे हैं।”

केरल उच्च न्यायालय में इस मामले की अगली सुनवाई 22 फरवरी को होगी और केबल ऑपरेटर उम्मीद कर रहे हैं कि न्यायालय का फैसला उनके पक्ष में आएगा क्योंकि उन्होंने इस लड़ाई को जनता की लड़ाई बना कर पेश किया है।

AIDCF के अनुसार broadcasters और कीमतें बढ़ा सकते हैं और ग्राहकों के लिए कीमतों में वृद्धि 60% तक हो सकती है।

“वर्ष 2019 में broadcasters ने अपने कुछ चैनल्स की कीमतों में 400% तक की वृद्धि की थी। राष्ट्रीय स्तर पर, इस तरह की मूल्य वृद्धि का मतलब है कि उपभोक्ताओं से 5000 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूले गए। हाल की बढ़ोत्तरी के साथ, broadcasters की कमाई में एक वर्ष में 8000 करोड़ रुपये का इजाफा होगा,” AIDCF ने कहा।

AIDCF ने TRAI पर इस मामले में उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है। 

“सेक्टर रेगुलेटर ट्राई ने इस डिस्कनेक्शन की जानकारी होने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया है ताकि केबल टीवी ग्राहकों को असुविधा न हो,” AIDCF ने कहा।

केबल ऑपरेटरों को अपनी कमाई कम होने डर

भले ही यह मामला जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ की तौर पर पेश किया जा रहा है लेकिन हकीकत में केबल ऑपरेटरों को उनकी कमाई में सेंध लगने का डर सता रहा है।

दरअसल, केबल के bouquet दो तरह के होते हैं। एक जो broadcasters अपने कई चैनलों को मिलाकर 45% तक की छूट के साथ ऑफर करते हैं और दूसरा जो केबल ऑपरेटर (DPO) अपने उपभोक्ताओं को ऑफर करते हैं।

इसके साथ ही, कोई भी उपभोक्ता अलग-अलग (a-la-carte) चैनल भी खरीद सकता है। हालांकि, a-la-carte चैनल ज्यादातर DTH पर खरीदे जाते हैं क्योंकि उनके ऑटोमेटेड सिस्टम (वेबसाइट या ऐप) के जरिए उपभोक्ता आसानी से कोई भी चैनल चुन या हटा सकते हैं। ये DTH ऑपरेटर अपने उपभोक्ताओं को कोई भी पैकेज खरीदने के लिए ज़ोर नहीं डालते।

वहीं दूसरी ओर, केबल ऑपरेटर अपने उपभोक्ताओं से सीधा संपर्क में रहते हैं और ज़्यादातर अपने पैकेज ही उपभोक्ताओं को बेचते हैं।

केबल ऑपरेटर अपना पैकेज विभिन्न broadcasters के पैकेज को मिला कर बनाते हैं। ऐसे में ज़ाहिर है कि केबल ऑपरेटरों के पैकेज की कीमत भी बढ़ेगी जब broadcasters के bouquet महंगे होंगे।

जैसा कि ऊपर बताया गया है, फुल पैकेज की कीमतों में कुल बढ़ोत्तरी केवल 10-15% तक होगी बावजूद इसके के broadcasters के कुछ bouquet 30% तक महंगे कर दिए गए हैं।

केबल ऑपरेटरों के द्वारा WhatsApp पर भेजी जा रही कई फोटो पर नज़र डालने से यह साबित हो जाता है।

कीमतों में बढ़ोत्तरी के साथ कुछ broadcasters को डर सता रहा है कि केबल ऑपरेटर कहीं उनके bouquet को अपने पैकेज से नहीं निकाल दें।

ऐसे में broadcasters ने ये शर्त रखी कि उनके bouquet का कवरेज DPO पैकेज में 85-90% तक होने पर ही केबल ऑपरेटर incentive पाने के लिए हकदार होंगे।

“ब्रॉडकास्टर incentive के योग्य होने के लिए डीपीओ के पैकेज में अपने बुके के 85-90% कवरेज के लिए शर्त रख रहे हैं। पहले यह 75% हुआ करता था। मूल्य वृद्धि के बाद, हमें डर है कि उपभोक्ता हमारे पैकेज के बजाय a-la-carte चैनल चुनेंगे। दोनों बातें एक साथ कैसे हो सकती हैं?” एक डीपीओ प्रतिनिधि ने कहा।

बुके कवरेज को लेकर चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए TRAI के सूत्र ने कहा कि यह ऐसा मामला है जिसे ब्रॉडकास्टर और केबल ऑपरेटर आमने-सामने बैठकर सुलझा सकते हैं।

"ब्रॉडकास्टर आपस में बातचीत के माध्यम से इस मुद्दे को हल करने के लिए तैयार हैं। कीमतों में कुल इज़ाफ़ा 5-10% है और कवरेज की शर्त भी negotialble है। यदि इसके बाद भी गतिरोध जारी रहता है, तो यह कुछ और है और मूल्य वृद्धि का मामला नहीं है," सूत्र ने कहा।

क्या हो सकता है ये “कुछ और मामला”

हालांकि ये पहली बार नहीं है कि ब्रॉडकास्टर और केबल ऑपरेटर आपस में भिड़े हैं, लेकिन आगामी आईपीएल सीज़न को देखते हुए इस झगड़े का महत्व बढ़ गया है।

अगले 5 सालों के लिए आईपीएल के मीडिया rights दो भागों में बंट गए हैं – स्टार इंडिया के पास टीवी rights और रिलायंस के स्वामित्व वाली वायकॉम18 के पास डिजिटल rights.

ऐसे में इंडस्ट्री के विशेषज्ञों को अंदेशा है कि दोनों कंपनियां एक दूसरे को का खेल बिगाड़ने की कोशिश में लगी हैं और स्टार इंडिया के खिलाफ माहौल बनाने के चक्कर में NTO 3.0 को मोहरा बनाया जा रहा है। 

एक विशेषज्ञ ने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता तो SITI Cable क्यों NTO 3.0 के तहत इंटरकनेक्शन सौदों पर हस्ताक्षर करता? “ये देखते हुए कि रिलायंस के स्वामित्व वाली वायकॉम18 ने अपने सिग्नल नहीं काटे हैं, यह शक और भी गहरा हो जाता है।”

ग़ौरतलब है कि AIDCF के बड़े सदस्यों में DEN और Hathway हैं जो रिलायंस के ही केबल ऑपरेटर हैं।

इंडस्ट्री का एक तबका इसे केबल ऑपरेटरों बनाम broadcasters के बजाय रिलायंस और स्टार इंडिया के बीच लड़ाई के रूप में देख रहा है।

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